Tuesday, April 28, 2009

विश्वास की कविता

पृथ्वी और सूर्य विश्वास की कविता है
सदियों से सदियों तक इक ही तो पृथ्वी है इक ही तो सूर्य

विश्वास की कविता

विश्वास की कविता

Tuesday, February 3, 2009

जो पढ़ा अभी अभी

इन दिनों पोलो कोहेलो के अल्क्समिस्त को पढ़ रही हूँ वे कहते है यदि आप कुछ करना चाहते है तो सारी दुनिया की ताकते आपके साथ हो जाती है

Wednesday, January 28, 2009

लौट के आना बार बार

लौट के आती हूँ बार बार
जैसे लौटती है लहरे बार बार तट पर