Monday, November 24, 2008

किरायदार

मांसी की बहुत इछा थी
की हो उसका भी अपना घर
पूरी उम्र गुजार दी उसने
फिर इक दिन
हुआ उसका भी घर
पर तब
गुजर बसर करने के लिए उम्र ही नही बची थी उसके पास

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